जब वीरावती ने पहला करवा चौथ व्रत तोड़ दिया, तो उसका पति मर गया – लेकिन अगले साल की निष्ठा ने उन्हें पुनर्जीवित किया। यह कहानी, इंद्रप्रस्थपुर के ब्राह्मण वेदशर्मा की बेटी से शुरू होती है और आज के उत्तर भारत में 29 अक्टूबर 2025 को मनाए जाने वाले करवा चौथउत्तर भारत तक पहुँचती है। महिलाएँ सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला उपवास रखती हैं, और बाद में शिव‑पार्वती की पूजा व चंद्रदेव को आर्घ्य अर्पित करती हैं। यह न केवल धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि वैवाहिक बंधन को सुदृढ़ करने वाला सामाजिक अनुष्ठान भी है।
इतिहास और पौराणिक पृष्ठभूमि
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, करवा चौथ का मूल इंद्रप्रस्थपुर में स्थित ब्राह्मण वेदशर्मा के घर में हुआ था। उन्होंने सात बेटियों और एक बेटी को पाल रखा, जिनमें वीरावती प्रमुख थी। पहली बार उसने उपवास रखा तो अचानक कमजोरी के कारण वह झूठी चाँद का प्रकाश देख कर उपवास तोड़ बैठी, जिससे उसके पति का निधन हो गया। यह दुखद घटना उसके भाइयों ने गढ़ी हुई आग के पीछे रखी चाँद की नकल थी।
गुस्सा और निराशा में देवी पार्वती ने उसे अगले साल पूरे मन‑संकल्प के साथ व्रत रखने को कहा। उसी वर्ष उसकी पवित्रता का फल मिला: उसके पति का जीवन फिर से लौट आया। इस कथा को कई स्रोतों ने दोहराया – Moneycontrol की 10 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट, Times Now Hindi का लेख और Nature Desires का यूट्यूब वीडियो।
व्रत की विस्तृत विधि‑विधान
करवा चौथ का व्रत 5‑6 घंटे तक नहीं, बल्कि पूरी दोपहर से लेकर चाँद के उदय तक चलता है। दिन की शुरुआत में घर की महिलाएँ सॉबे और काजू‑बादाम से बने खीर का प्रसाद तैयार करती हैं। संध्या होते ही पूरे परिवार की महिलाएँ शिव‑पार्वती की आराधना करती हैं, फिर चाँद की रोशनी का इंतज़ार करती हैं। चाँद के दिखते ही, कड़छी में पानी डालकर चाँद को ‘आर्घ्य’ किया जाता है; महिला अपने पति को वही पहला घूँट देती है। तभी व्रत टूटता है।
जांशट्टा के अनुसार, इस दौरान कथा‑पाठ करना अनिवार्य माना जाता है: ‘करवा चौथ पर जो महिला कथा पढ़ती या सुनती है, उसे शुभ फल प्राप्त होते हैं।’ इस राज़ को कई घरों में पीढ़ी‑दर‑पीढ़ी चलाया जाता है।
मीडिया और सामाजिक प्रभाव
2025 में करवा चौथ की विशेषताएँ डिजिटल युग में भी बदल रही हैं। Nature Desires के यूट्यूब चैनल पर पंजाबी में प्रस्तुत कथा ने 86,000 से अधिक दर्शक जोड़े। सोशल मीडिया पर हैशटैग #KarvaChauth2025 ट्रेंड में रहा, जिससे युवती‑युवा को भी इस परम्परा में भागीदारी मिली।
एक और दिलचस्प पहल थी वित्तीय संस्थानों की – कई बैंकों ने इस अवसर पर ‘विवाह सुरक्षा बीमा’ के ऑफर लॉन्च किए, यह दर्शाता है कि ट्रेडिशनल व्रत अब व्यावसायिक रणनीति का भी हिस्सा बन गया है।
समकालीन महत्व और बदलते रिवाज़
आज के समय में करवा चौथ केवल पुरानी परम्परा नहीं रहा; यह महिलाओं की स्वायत्तता, स्वास्थ्य‑सचेतनता और सामाजिक सामंजस्य का प्रतीक बन चुका है। कई शहरी परिवारों में अब ‘निरंतर जल पीना’ की अनुमति दे दी जाती है, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम घटते हैं। साथ ही, इस त्योहार को लेकर सामाजिक जागरूकता भी बढ़ी – कई NGOs ने महिलाओं की डॉ. और मानसिक स्वास्थ्य पर कार्यशालाएँ आयोजित कीं।
फिर भी, पारंपरिक रूप से बोली जाती बात ‘पति‑पत्नी के बंधन को अमर बनाने के लिए प्रतिबद्धता का प्रतीक’ अभी भी गूंजती है। यह भावनात्मक अभिव्यक्ति, चाहे वह पवित्र कथा हो या आधुनिक स्वास्थ्य‑सलाह, इस त्योहार को कई अर्थ देता है।
आगे क्या उम्मीदें?
अगले साल 2026 में करवा चौथ 28 अक्टूबर को पड़ने वाला है। विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग से कथा‑पाठ, लाइव पूजा और ऑनलाइन सामुदायिक जुड़ाव बढ़ेगा। साथ ही, ग्रामीण‑शहरी अंतर को पाटने के लिये स्थानीय भाषा में अधिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह, यह परम्परा न केवल जीवित रहेगी, बल्कि नई पीढ़ी के लिये भी प्रासंगिक बनेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
करवा चौथ का मूल क्या है?
करीब पाँच हजार साल पहले इंद्रप्रस्थपुर के ब्राह्मण वेदशर्मा के घर में उत्पन्न हुई इस कथा में वीरावती की परीक्षा और उसके पति के पुनरुत्थान का वर्णन है, जिससे यह त्योहार वैवाहिक बंधन की रक्षा के लिये स्थापित हुआ।
2025 में करवा चौथ कब मनाया गया?
2025 में करवा चौथ बुधवार, 29 अक्टूबर को पड़ा। इस दिन के लिए सभी प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का समय अलग‑अलग था, पर सभी ने उसी दिन व्रत समाप्त किया।
व्रत तोड़ने की सही विधि क्या है?
पहले शिवार्पण और पार्वती पूजा के बाद, चंद्रदेव को कड़छी में पानी से आर्घ्य देते हैं। फिर पति को प्रथम घूँट दिया जाता है; इस क्षण ही उपवास समाप्त माना जाता है।
क्या करवा चौथ आधुनिक समय में बदल रहा है?
हाँ, स्वास्थ्य कारणों से कई महिलाएँ जल सेवन की अनुमति ले रही हैं, और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर कथा‑पाठ, लाइव पूजा और सामाजिक जागरूकता की गतिविधियाँ बढ़ रही हैं।
कौन‑कौन से मीडिया चैनल इस कथा को प्रसारित कर रहे हैं?
Moneycontrol, Times Now Hindi, Jansatta और यूट्यूब पर Nature Desires जैसे चैनलों ने विभिन्न भाषाओं में कथा प्रस्तुत की, जिससे क्षेत्रों‑दर‑क्षेत्रों में पहुँच विस्तारित हुई।
Anu Deep
अक्तू॰ 11, 2025 AT 02:20 पूर्वाह्नकरवा चौथ की कहानी बहुत दिलचस्प है यह बताती है कि कैसे निष्ठा से व्रत करने से भी जीवन में बदलाव आ सकता है
वीरावती की कथा में पति की मौत फिर वापसी दर्शाती है सामाजिक विश्वास को
आज भी कई घरों में वही रीति‑रिवाज़ चले आ रहे हैं और इसे नई पीढ़ी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर भी देख रही है
व्रत की प्रक्रिया में सावधानी भी जरूरी है जैसे पानी की अनुमति बदलना
समाज में इस त्यौहार को महिला सशक्तिकरण का एक रूप भी माना जा रहा है
Preeti Panwar
अक्तू॰ 11, 2025 AT 02:30 पूर्वाह्नकरवा चौथ की भावना को महसूस करना बहुत ख़ास है 😊
MANOJ SINGH
अक्तू॰ 11, 2025 AT 02:40 पूर्वाह्नये सब पुरानी बातों में फँस कर समय बर्बाद नहीं कर सकते हमको तो सच्ची जानकारी चाहिए
Vaibhav Singh
अक्तू॰ 11, 2025 AT 02:50 पूर्वाह्नव्रत की सही विधि में जल सेवन की अनुमति बहुत जरूरी है नहीं तो स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता है
harshit malhotra
अक्तू॰ 11, 2025 AT 03:00 पूर्वाह्नकरवा चौथ सिर्फ़ एक त्यौहार नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ें दर्शाता है
वीरावती की कथा हमें सिखाती है कि निष्ठा और धैर्य से बड़ी मुश्किलें भी पार की जा सकती हैं
इतिहास में इस व्रत का उद्भव इंद्रप्रस्थपुर में हुआ था जहाँ ब्राह्मण वेदशर्मा के घर में यह इतिहास शुरू हुआ
पहली बार जब वीरावती ने उपवास तोड़ दिया तो उसके पति का निधन हो गया यह सब जादू‑टोने का परिणाम माना जाता है
परंतु अगली बार जब उसने पूरी लगन से व्रत रखा तो उसकी शक्ति वापसी हुई और पति जीवित हो गया
यह कथा कई शास्त्रों और आधुनिक मीडिया में भी दर्ज है जैसे Moneycontrol और Times Now की रिपोर्ट में
आज के समय में यह त्यौहार महिलाओं को एकजुट करता है और पारिवारिक बंधन को मजबूत बनाता है
शहरी इलाके में इस व्रत को डिजिटल रूप में मनाया जाता है जहाँ ऑनलाइन कथा‑पाठ और लाइव पूजा होती है
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से इस रिवाज़ को नई पीढ़ी तक पहुँचाना आसान हुआ है लेकिन साथ ही चुनौतियाँ भी आई हैं
उदाहरण के तौर पर जल सेवन की अनुमति अब अनुमति सूची में जोड़ा गया है जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ कम हुई हैं
साथ ही कई बैंकों ने इस अवसर पर वैवाहिक सुरक्षा बीमा की पेशकश शुरू की है जिससे आर्थिक सुरक्षा भी जोड़ में आई है
समाज में इस त्यौहार को महिलाओं की स्वायत्तता और स्वास्थ्य जागरूकता का प्रतीक माना जा रहा है
धार्मिक पहलू के साथ साथ आधुनिक विज्ञान और सामाजिक बदलाव भी इस व्रत में सम्मिलित हो रहे हैं
भविष्य में हम देखेंगे कि कैसे ऑनलाइन कनेक्शन और स्थानीय भाषा की सामग्री इस रिवाज़ को और व्यापक बनाएँगी
अंत में यह कहा जा सकता है कि करवा चौथ का मूल उद्देश्य वैवाहिक बंधन को सुदृढ़ करना है और यह आज भी वही भूमिका निभा रहा है
saurabh waghmare
अक्तू॰ 11, 2025 AT 03:10 पूर्वाह्नऐसे विस्तृत लेख से हमें करवा चौथ के इतिहास और आधुनिक प्रचलन दोनों का स्पष्ट चित्र मिलता है यह जानकारी साझा करने के लिए धन्यवाद
Madhav Kumthekar
अक्तू॰ 11, 2025 AT 03:20 पूर्वाह्नयदि कोई पहली बार करवा चौथ रख रहा है तो उसे व्रत की शुरुआत में हल्की खीर और पानी की अनुमति के बारे में सलाह देना उपयोगी रहेगा
Hrishikesh Kesarkar
अक्तू॰ 11, 2025 AT 03:30 पूर्वाह्नव्रत में जल सेवन की अनुमति अब आम हो गई है
Manu Atelier
अक्तू॰ 11, 2025 AT 03:40 पूर्वाह्नकरवा चौथ के सामाजिक प्रभाव और आर्थिक पहलू दोनों को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है
Ankit Intodia
अक्तू॰ 11, 2025 AT 03:50 पूर्वाह्नभाईयो बहनो करवा चौथ का ट्रेंड देख के लग रहा है कि अब सब लोग इसे ऑनलाइन भी धूमधाम से मना रहे हैं
Aaditya Srivastava
अक्तू॰ 11, 2025 AT 04:00 पूर्वाह्नयही नहीं अब तो बैंक वाले भी इस दिन स्पेशल इन्शुरेंस दे रहे हैं मज़ा आ गया
Vaibhav Kashav
अक्तू॰ 11, 2025 AT 04:10 पूर्वाह्नअरे वाह अब तो शादी की बीमा भी करवा चौथ पर मिलती है जैसे हर चीज़ को कमर्शियल बना दिया गया है
Swapnil Kapoor
अक्तू॰ 11, 2025 AT 04:20 पूर्वाह्नइस त्यौहार के बारे में सही जानकारी देना जरूरी है क्योंकि गलतफहमी से लोग अनावश्यक तनाव में पड़ सकते हैं
Shruti Thar
अक्तू॰ 11, 2025 AT 04:30 पूर्वाह्नकरवा चौथ का सांस्कृतिक महत्व वास्तव में भारतीय परम्परा की गहराई को दर्शाता है
Nath FORGEAU
अक्तू॰ 11, 2025 AT 04:40 पूर्वाह्नडिजिटल मंचों पर कथा‑पाठ ने पहुँच को बढ़ाया है
Preeti Panwar
अक्तू॰ 11, 2025 AT 04:50 पूर्वाह्नबहुत ही विस्तृत और गहन विश्लेषण है धन्यवाद इस में बहुत कुछ नया सीखने को मिला 🙏
Anu Deep
अक्तू॰ 11, 2025 AT 05:00 पूर्वाह्नआपकी सराहना से ही हम और अधिक जानकारी लाने की प्रेरणा पाते हैं आगे भी ऐसे ही साझा करें
Deepanshu Aggarwal
अक्तू॰ 11, 2025 AT 05:10 पूर्वाह्नजल सेवन की अनुमति से व्रत आसान हो गया है लेकिन डॉक्टर की सलाह लेना भी ज़रूरी है 😊