पोप फ्रांसिस — ताज़ा खबरें, बयान और वैटिकन की नीतियाँ

क्या पोप सिर्फ धार्मिक नेता हैं या दुनिया भर की राजनीति, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर असर डालने वाले व्यक्‍ति भी? पोप फ्रांसिस ने इस सवाल का जवाब सीधे अपने काम से दिया है। जन्म नाम Jorge Mario Bergoglio, वे 2013 में चुने गए और वे पहले लैटिन अमेरिकी पोप हैं। उनकी शैली सरल बोलचाल की है, पर उनके फैसले और बयान अक्सर बड़े प्रभाव वाले होते हैं।

यह पेज उन लोगों के लिए है जो पोप फ्रांसिस से जुड़ी ताज़ा खबरें, उनके प्रमुख बयान, यात्राओं और वैटिकन में चल रहे सुधारों का सीधा और समझने में आसान अवलोकन चाहते हैं। यहाँ आपको एनसाइक्लिकल, इंटरव्यू, वैश्विक यात्राओं और वैटिकन की आर्थिक व प्रशासनिक खबरों की जानकारी मिलेगी — बिना जटिल शब्दावली के।

मुख्य दिशा और प्रमुख बयान

पोप फ्रांसिस ने पर्यावरण को लेकर 2015 में "Laudato Si'" नामक एनसाइक्लिकल जारी की — इसमें क्लाइमेट और गरीबी के जुड़े पहलुओं पर ज़ोर था। इसके अलावा उन्होंने पारिवारिक जीवन पर "Amoris Laetitia" जैसी दस्तावेज़ों में व्यावहारिक नजरिया दिखाया। कोरोना के समय उन्होंने वैक्सीनेस के समर्थन में खुले तौर पर बात की और गरीबों के लिए मदद की अपील भी की।

वाटिकन की वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासन सुधार भी उनके एजेंडे में खास रहे हैं। बैंकिंग नियमों और आंतरिक लेखा-जोखा में बदलाव लाने की पहलें चल रही हैं। अंतरधार्मिक संवाद में भी उनका रोल बड़ा रहा — 2019 में अबू धाबी में "Human Fraternity" दस्तावेज़ जैसी पहलें इस बात का संकेत हैं कि वे संवाद के जरिये विवाद हल करना पसंद करते हैं।

यहाँ क्या पढ़ने को मिलेगा और कैसे फॉलो करें

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अगर आप किसी खास विषय पर गहराई चाहते हैं — उदाहरण के लिए पोप के पर्यावरणीय विचारों का भारत में प्रभाव या वैटिकन के प्रशासन सुधार — नीचे दिए गए आर्काइव लिंक से संबंधित रिपोर्ट पढ़ सकते हैं। सवाल हैं? कमेंट में पूछिए, हम सरल भाषा में जवाब देंगे और नए अपडेट जोड़ते रहेंगे।

समलैंगिक लोगों के प्रति बयान पर पोप फ्रांसिस ने मांगी माफी: चर्च में सभी के लिए जगह

पोप फ्रांसिस ने पवित्रता प्रेस कार्यालय के निदेशक, माटेओ ब्रूनी के माध्यम से समलैंगिक लोगों के सम्बन्ध में दिए गए अपने बयान के लिए माफी मांगी है। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द से कुछ लोगों को अनजाने में ठेस पहुंची है। पोप ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब होमोफोबिक भावना व्यक्त करना नहीं था। चार्च में सबके लिए जगह है।