तंबाकू नियंत्रण — क्यों जरूरी है और आप क्या कर सकते हैं
क्या आप जानते हैं कि तंबाकू सिर्फ धुआँ नहीं है, बल्कि परिवार की सेहत और जेब पर लगातार असर डालने वाला खतरा है? तंबाकू नियंत्रण का मतलब सिर्फ धूम्रपान रोकना नहीं — यह बीमारियों, बच्चे और पास के लोगों को होने वाले नुकसान को कम करने का काम है। यहाँ सीधे और practical बातें बताई जा रही हैं जो आपको, आपके घर और समुदाय को सुरक्षित रख सकती हैं।
तंबाकू नियंत्रण: नीति और कानूनी पहल
भारत में COTPA (Cigarettes and Other Tobacco Products Act) जैसे कानून सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान पर रोक, विज्ञापन प्रतिबंध और उठाने योग्य नियम लागू करते हैं। साथ ही नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम (NTCP) तंबाकू विरोधी प्रयासों को बल देता है — चेतावनी लेबल, प्रतियोगी प्रचार पर रोक और टॉबैको सिविल जागरूकता। इन नियमों का मकसद सिर्फ उत्पादों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि लोगों को तम्बाकू के नुकसान से बचाना है।
फिर भी लागू करना आसान नहीं होता। कई बार दुकानें नियम तोड़ती हैं, पब्लिक स्पेस में लोग धुआँ करते हैं, और गुटखा-खैनी जैसी तंबाकू की बोतलों पर कम ध्यान दिया जाता है। आप क्या कर सकते हैं? अपने इलाके के स्वास्थ्य अधिकारी को नियम उल्लंघन की सूचना दें, स्कूलों में जागरूकता बढ़ाएँ और कार्यस्थल पर स्मोक-फ्री पॉलिसी की मांग करें।
तंबाकू छोड़ने के व्यावहारिक कदम
छोड़ने का विचार किया है? छोटे कदम बड़े फर्क लाते हैं। पहले एक तारीख तय करें — अगले 7-14 दिनों में। उस दिन के लिए योजना बनाइए: पैक हटाएँ, रौशनियों और स्मोकिंग एरिया की आदत बदलें, और एक सपोर्ट सिस्टम बनाएँ — परिवार या दोस्त जिन्हें आप बता सकें।
कुछ आसान तरीका जो आज़माएं — निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (गम/पैच) डॉक्टर से सलाह लेकर लें, व्यवहारिक काउंसलिंग लें, और जब जरूरत लगे तो मोबाइल ऐप या लोकल टोबैको-सेसन सेंटर की मदद लें। शराब और तम्बाकू के साथ जुड़ी जगहों से दूर रहें; कॉफी या ड्रिंक बदल देने से क्रेविंग कम हो सकती है। छोटी-छोटी जीतों के लिए खुद को पुरस्कृत करें — एक सप्ताह, एक महीना, तीन महीने।
स्मोकलेस तंबाकू (गुटखा, खैनी) भी उतना ही खतरनाक है। मुंह, गले और हृदय की बीमारियाँ इनसे बढ़ती हैं। इसलिए केवल सिगरेट छोड़ना ही काफ़ी नहीं — सभी प्रकार के तंबाकू से दूरी बनानी होगी।
क्या आप घर और गाड़ी में धुआँ रोके हुए हैं? अभी नियम बनाइए: "घर में स्मोक-फ्री" और "कार में सिगरेट नहीं"। बच्चों और बुजुर्गों को पास रखने से उनकी सेहत बेहतर रहती है।
तंबाकू नियंत्रण एक व्यक्तिगत और सार्वजनिक जिम्मेदारी है। छोटे व्यवहारिक कदम, सरकारी नियमों की जानकारी और सही मदद लेने से यह आदत छोड़ी जा सकती है। आप चाहें तो आज ही पहला कदम उठाइए — किसी से बात करें, हेल्पलाइन या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें, और अपने घर को धुआँ-मुक्त बनाइए।
विश्व नो टोबैको डे: भारत में क्यों किशोर लड़कियां अधिक धूम्रपान कर रही हैं?
विश्व नो टोबैको डे के अवसर पर, भारत में यह ध्यान देने योग्य है कि किशोर लड़कियों में धूम्रपान की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। यूनियन स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जहां कुल धूम्रपान की दर में गिरावट आई है, वहीं किशोर लड़कियों के बीच धूम्रपान दुगुना हो गया है। यह प्रवृत्ति इस तथ्य से और भी गंभीर हो जाती है कि धूम्रपान के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव अत्यधिक हानिकारक होते हैं।