मौसम अलर्ट: IMD ने बताया मॉनसून 2026 कमजोर, एल नीनो का खतरा

कल्पना कीजिए कि गर्मी से राहत की उम्मीद में आप बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन भारतीय मौसम विभाग (IMD) की नई रिपोर्ट कहती है कि यह राहत देर से आएगी। विभाग ने अपने दूसरे लॉन्ग रेंज पूर्वानुमान में चेतावनी दी है कि जून से सितंबर 2026 के बीच पूरे देश में मानसून 'सामान्य से कम' रहने की संभावना है। सरल शब्दों में, हमें उस बारिश की उम्मीद नहीं जो हम आमतौर पर देखते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पीछे एल नीनो प्रभाव जिम्मेदार हो सकता है, जिससे न केवल बारिश में कमी आएगी, बल्कि कई हिस्सों में भयंकर गर्मी भी जारी रहेगी। किसानों और आम जनता के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई और पानी की उपलब्धता सीधे तौर पर प्रभावित होगी।

IMD का आधिकारिक अनुमान: क्या कहते हैं आंकड़े?

IMD ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 की ऋतुनिष्ठ वर्षा दीर्घावधि औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। यहाँ एक महत्वपूर्ण बात यह है कि मॉडल में ±4 प्रतिशत की त्रुटि की गुंजाइश है। इसका मतलब है कि वास्तविक बारिश LPA के 86% से 94% के बीच कहीं भी हो सकती है।

विभाग ने अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया है कि 'सामान्य से कम' या 'कम' वर्षा की संयुक्त संभावना 84% आंकी गई है। जबकि 'सामान्य' या उससे अधिक बारिश की संभावना काफी कम है। ट्विस्ट यह है कि उत्तर-पूर्व भारत को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की कमी महसूस होने वाली है।

  • उत्तर-पूर्व भारत: यहाँ बारिश 'सामान्य' (LPA के 94-106%) रहने की उम्मीद है।
  • मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: इन क्षेत्रों में बारिश LPA के 94% से कम रहने की संभावना है।
  • उत्तर-पश्चिम भारत: यहाँ बारिश LPA के 92% से कम रह सकती है।
  • मॉनसून कोर जोन: जहाँ अधिकांश कृषि वर्षा-आधारित है, वहाँ भी बारिश सामान्य से नीचे रहने का खतरा बना हुआ है।

जून 2026: कमजोर शुरुआत और ऊष्मा लहर

जून 2026 के लिए IMD ने अलग से मासिक पूर्वानुमान जारी किया है, जो थोड़ा निराशाजनक है। पूरे देश के स्तर पर जून की औसत वर्षा LPA के 92% से कम रहने की संभावना है। यानी मॉनसून की शुरुआत ही कमजोर हो सकती है।

लेकिन बारिश की कमी का सबसे बड़ा असर तापमान पर पड़ेगा। IMD ने चेतावनी दी है कि जून 2026 के दौरान अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में 'हीट वेव डेज' (ऊष्मा लहर वाले दिन) सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में भी इसका असर दिख सकता है।

स्काइमेट का अनुमान: क्या IMD से अंतर है?

सरकारी एजेंसी IMD के साथ-साथ निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट मौसम सेवाएं (Skymet Weather Services) ने भी अपना पहला सर्वभारतीय पूर्वानुमान जारी किया है। दोनों एजेंसियों के अनुमानों में एक समानता है—मानसून कमजोर रहेगा—लेकिन आंकड़ों में थोड़ा अंतर है।

स्काइमेट के अनुसार, जून से सितंबर 2026 के चार महीनों में कुल मौसमी बारिश LPA के लगभग 94 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो IMD के 90% के अनुमान से थोड़ा बेहतर लग सकता है, लेकिन फिर भी इसे 'सामान्य से कमजोर' माना गया है। स्काइमेट ने कुल औसत बारिश को लगभग 817 मिलीमीटर (+/- 5%) आंका है।

माहवार विवरण दिलचस्प है:

  • जून 2026: लगभग 101% (सामान्य), विशेष रूप से उत्तर भारत और पश्चिमी घाट में अच्छी बारिश की उम्मीद।
  • जुलाई 2026: 94% (सामान्य से कम की सीमा पर)।
  • अगस्त 2026: 92% (कम बारिश की संभावना अधिक)।
  • सितंबर 2026: केवल 89% (सबसे कमजोर), जिससे सूखे का खतरा बढ़ सकता है।

स्काइमेट ने जोखिम विश्लेषण में यह भी कहा है कि देश में सूखे की स्थिति बनने की संभावना लगभग 30% है, और कुल बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना 40% है।

एल नीनो: मौसम बिगाड़ने वाला मुख्य दोषी?

तो, ऐसा क्यों हो रहा है? दोनों एजेंसियों ने एल नीनो (El Niño) को इस कमजोर मानसून का मुख्य कारण बताया है। एल नीनो एक जलवायु पैटर्न है जो प्रशांत महासागर के पानी के तापमान में वृद्धि से होता है। ऐतिहासिक रूप से, एल नीनो की स्थितियां भारत में मानसून को कमजोर करती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञ चर्चाओं में यह बात बार-बार उठी है कि अगर जून में बारिश कम हुई और एल नीनो का प्रभाव बना रहा, तो जुलाई से सितंबर तक भी बारिश का वितरण असमान रहेगा। इसका सीधा असर किसानों की बुवाई की रणनीति पर पड़ेगा। क्या बाद के महीनों में मानसून भारत की फसलों को बचा पाएगा? यह सबसे बड़ा सवाल है।

कृषि और आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?

कमजोर मानसून का असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसके गहरे社会经济 प्रभाव होंगे। सबसे पहले, खरीफ फसलों (जैसे चावल, मक्का, सोयाबीन) की बुवाई पर असर पड़ेगा। यदि जुलाई से सितंबर तक बारिश में कमी रही, तो सिंचाई की उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

दूसरी ओर, जल संसाधन प्रबंधन पर दबाव बढ़ेगा। बांदों में पानी भरने में देरी हो सकती है, जिससे बिजली उत्पादन (हाइड्रो पावर) और पीने के पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। गर्मी के लंबे समय तक रहने से स्वास्थ्य समस्याएं और बिजली की मांग में वृद्धि भी एक चुनौती बनेगी।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश समय पर और सही तरीके से होती है, तो इन नकारात्मक प्रभावों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए, आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति पर नज़दीकी नज़र रखना और अनुकूलन योजनाएं बनाना नीति निर्माताओं और किसानों दोनों के लिए आवश्यक होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या 2026 में मानसून पूरी तरह से विफल हो जाएगा?

नहीं, मानसून पूरी तरह से विफल नहीं होगा। IMD और स्काइमेट दोनों के अनुसार, बारिश 'सामान्य से कम' (Below Normal) रहेगी, जिसका अर्थ है कि दीर्घावधि औसत (LPA) से 10-6% कम बारिश होगी। हालांकि, यह अभी भी फसलों के लिए पर्याप्त हो सकती है यदि वितरण सही रहे, लेकिन सूखे का खतरा बना हुआ है।

कौन से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे?

मध्य भारत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होने की संभावना है, जहाँ बारिश LPA के 94% या 92% से कम रहने की उम्मीद है। उत्तर-पूर्व भारत को अपेक्षाकृत बेहतर बारिश (सामान्य) मिल सकती है।

एल नीनो क्या है और यह मानसून को कैसे प्रभावित करता है?

एल नीनो प्रशांत महासागर के पानी के तापमान में वृद्धि की एक घटना है। यह वैश्विक मौसम पैटर्न को बदल देता है और आमतौर पर भारत में मानसून की तीव्रता को कम करता है, जिससे बारिश में कमी और गर्मी में वृद्धि होती है। 2026 में एल नीनो के संकेत मिल रहे हैं।

किसानों को इस स्थिति में क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई में देरी करने या ऐसे बीजों का चयन करने पर विचार करना चाहिए जो कम पानी में भी लंबे समय तक टिक सकें। सिंचाई के विकल्पों को सुनिश्चित करना और मौसम की नियमित अपडेट पर नज़र रखना आवश्यक है ताकि अचानक बदलाव का सामना किया जा सके।

जून 2026 में गर्मी कम होगी या बढ़ेगी?

IMD के अनुसार, जून 2026 में अधिकांश क्षेत्रों में तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और अन्य कई राज्यों में 'हीट वेव' वाले दिन सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि गर्मी से राहत देर से मिलेगी।

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akhila jogineedi

akhila jogineedi

मैं एक पत्रकार हूँ और मेरे लेख विभिन्न प्रकार के राष्ट्रीय समाचारों पर केंद्रित होते हैं। मैं राजनीति, सामाजिक मुद्दे, और आर्थिक घटनाओं पर विशेषज्ञता रखती हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य जानकारीपूर्ण और सटीक समाचार प्रदान करना है। मैं जयपुर में रहती हूँ और यहाँ की घटनाओं पर भी निगाह रखती हूँ।