एडएचडी निदान: पहला कदम क्या होना चाहिए

अगर आप सोच रहे हैं कि आपके बच्चे या आप खुद में ध्यान नहीं टिकता, बहुत बेचैनी रहती है या बार-बार काम अधूरा रह जाता है — तो एडएचडी निदान एकदम सही शुरुआत है। निदान सिर्फ एक टैग नहीं, बल्कि समझने की प्रक्रिया है कि कौन से लक्षण कितने समय से हैं और वे रोज़मर्रा ज़िन्दगी कैसे प्रभावित कर रहे हैं।

एडएचडी के आम संकेत — क्या देखें

बच्चों में: पढ़ाई में अस्थिरता, लगातार इधर-उधर घूमना, आदेश नहीं मानना, ध्यान केंद्रित न कर पाना, विघ्नकारी व्यवहार जो कक्षा या घर में मुश्किल बढ़ाए।

युवाओं/बड़ों में: काम अधूरा छोड़ना, समय प्रबंधन में दिक्कत, भूलना, बोरियत से जल्दी उखड़ जाना, रिश्तों में झटपट निर्णय। ध्यान रहे—लक्षण कम से कम 6 महीने से मौजूद होने चाहिए और दो या ज्यादा जगहों (जैसे घर और स्कूल) पर दिखने चाहिए।

निदान की प्रक्रिया — क्या उम्मीद रखें

एडएचडी का कोई एक खून या एमआरआई टेस्ट नहीं है। निदान क्लिनिकल होता है। आम तौर पर ये स्टेप्स होंगे:

  • व्यापक इतिहास: विकास, स्कूल रिपोर्ट, व्यवहार के उदाहरण — माता-पिता और शिक्षक से जानकारी ली जाती है।
  • रिलेटिव स्केल्स/चेकलिस्ट: Conners, Vanderbilt या वयस्कों के लिए ASRS जैसे रेटिंग फॉर्म भरे जाते हैं।
  • नैदानिक इंटरव्यू: बाल-मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (क्लिनिकल सायकॉलॉजिस्ट, चाइल्ड सायकाट्रिस्ट या पेडियाट्रिशियन) से साक्षात्कार।
  • जरूरत पड़ने पर सीखने या IQ मूल्यांकन और मेडिकल जाँच—हियरिंग, दृष्टि, थायरॉयड आदि।

निदान देते समय डॉक्टर DSM-5 या ICD मानदंड के आधार पर यह देखेंगे कि लक्षण कितने गंभीर हैं और क्या अन्य कारण (जैसे अनिद्रा, ऑडिटरी समस्या, अवसाद, लर्निंग डिसऑर्डर) तो नहीं।

कैसे तैयारी करें: स्कूल की रिपोर्ट, प्राथमिक अध्यापक के नोट्स, रोज़ के व्यवहार के सटीक उदाहरण, किसी दवा का रिकॉर्ड और आवश्यकता हो तो मोबाइल वीडियो दिखा सकते हैं—ये सब मदद करते हैं।

निदान के बाद: विशेषज्ञ आमतौर पर व्यवहारिक रणनीति, स्कूल में समायोजन और जरूरत पर दवा पर चर्चा करेंगे। निदान का मतलब तुरंत दवा नहीं—पहले पूरा मूल्यांकन और योजना बनाई जाती है।

भारत में मदद कहां मिलेगी: निःशुल्क या सस्ते विकल्प निवारक स्वास्थ्य केन्द्रों, सरकारी अस्पताल (जैसे NIMHANS) और निजी क्लीनिकों में उपलब्ध हैं। बच्चे के स्कूल से मिलकर IEP या व्यवहारिक प्लान बनवाना आसान रहता है।

अगर आप उलझन में हैं तो छोटा कदम उठाइए — स्थानीय बाल मनोचिकित्सक से कंसल्टेशन ले लीजिए या किसी स्कूल काउंसलर से बात करें। तेज़ निर्णय के बजाय सही पहचान और योजना लंबे समय में बेहतर असर देती है।

चाहिए तो में कुछ उपयोगी प्रश्न सूची भी दे सकता/सकती हूँ जो आप डॉक्टर से पूछ सकते हैं — बताइए, भेज दूँ।

अभिनेता फहाद फासिल ने एडएचडी निदान पर खोला राज, मानसिक स्वास्थ्य स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

मलयालम अभिनेता फहाद फासिल ने हाल ही में उद्घाटन समारोह में अपनी एडएचडी निदान के बारे में बताया। यह न्यूरोडेवलपमेंटल विकार बचपन में उभरता है और अक्सर वयस्कता तक बना रहता है। एडएचडी के लक्षणों में ध्यान न देना, अतिसक्रियता, और आवेगशीलता शामिल हैं। निदान स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर द्वारा किया जाता है। इसका प्रबंधन ब्यवहारिक चिकित्सा, दवाओं, और शिक्षात्मक समर्थन के मिश्रण से होता है।