जीएसटी आसान गाइड: रजिस्ट्रेशन से रिटर्न तक
क्या आप छोटे व्यवसायी, फ्रीलांसर या दुकानदार हैं और जीएसटी को लेकर उलझन में हैं? यहाँ जीएसटी के जरूरी पहलू सीधे और काम के तरीके में बताए गए हैं ताकि आप तुरंत लागू कर सकें।
कैसे रजिस्टर करें और क्या दस्तावेज चाहिए
अगर आपकी सालाना टर्नओवर सीमा पार हो रही है तो रजिस्ट्रेशन जरूरी है। रजिस्ट्रेशन gst.gov.in पर होता है — PAN, Aadhar, बिजनेस एड्रेस प्रूफ, बैंक अकाउंट और फोटो जैसे दस्तावेज लगते हैं।
रजिस्ट्रेशन के बाद आपको GSTIN मिलता है। इसे हर बिल पर दिखाना होता है। अगर टर्नओवर कम है तो Composition Scheme चुन सकते हैं, जहां टैक्स दरें सिम्पल और कम होती हैं, पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता।
रिटर्न फाइलिंग और हिसाब-किताब
मासिक रिटर्न GSTR-3B और इनवॉइस डिटेल GSTR-1 फाइल करनी होती है। छोटे व्यापारियों के लिए आसान रास्ता यह है कि हर महीने की बिक्री और खरीद का सारांश रखें ताकि आखिरी मिनट में दिक्कत न हो।
इनपुट टैक्स क्रेडिट तभी मिलेगा जब विक्रेता ने सही GST रिटर्न भरा हो और आपकी प्राप्तियों में उसका रेफरेंस दिखाई दे। इसलिए विक्रेता के GSTR-1 की स्टेटस चेक करते रहें।
रिटर्न देर से फाइल करने पर पेनल्टी और ब्याज लगता है — इसलिए समय पर फाइल करें। सॉफ्टवेयर या अकाउंटेंट से ऑटोमैटिक रिमाइंडर सेट कर लें।
इम्पोर्टेंट फॉर्म्स: GSTR-1 (बिक्री), GSTR-3B (साधारण मासिक), GSTR-9 (वार्षिक)। अलग-अलग कारोबार के हिसाब से और फॉर्म हो सकते हैं, जैसे TDS/TCS रिटर्न।
इनवॉइसिंग में HSN/SAC कोड सही भरें; गलत कोड से रिफंड और क्लेम में दिक्कत आती है।
अगर रिटर्न में गलती हो जाए तो सही प्रोसेस के जरिए सुधार करें; खुद से हटाने की कोशिश न करें — डेडलाइन और एडजस्टमेंट नियम होते हैं।
टैक्स बचाने के वैध तरीके: खर्चों के सही बिल रखें, इनवॉइस समय पर लेते रहें, Composition Scheme पर विचार करें यदि आपका मुनाफा छोटा है। टैक्स प्लानिंग के लिए साल के शुरू में अकाउंटेंट से सलाह लें।
आम गलतियाँ जिन्हें टाला जा सकता है: बिल्स का डिजिटली रिकॉर्ड न रखना, विक्रेता के रिटर्न चेक न करना, गलत GST स्लैब लगाना, और समय पर रिटर्न फाइल न करना। ये छोटी भूलें बाद में बड़ा खाता बना देती हैं।
अगर आप शुरुआत कर रहे हैं तो छोटे-छोटे कदम रखें: 1) रोज़ाना बिक्री और खरीद रिकॉर्ड करें, 2) महीने में एक बार reconciliation करें, 3) जीएसटी पोर्टल पर अकाउंट वेरिफाई रखें। ये आदतें बहुत काम आएंगी।
कोई कन्फ्यूजन हो तो GST हेल्पलाइन, चार्टर्ड एकाउंटेंट या हमारे 'क्या चल रहा है भारत' के टैक्स आर्टिकल्स देखें। सही जानकारी और टाइमिंग से आप टैक्स में बचत कर सकते हैं और बिना तनाव के कारोबार चला पाएंगे।
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