सेंसेक्स गिरावट: कारण, संकेत और आप क्या कर सकते हैं

जब सेंसेक्स नीचे आता है तो डर लगता है — पर क्या हर गिरावट पर बेच देना सही होता है? नहीं। गिरावट के पीछे कई कारण होते हैं और समझने से आप घबराकर नुकसान नहीं करते। यहाँ आसान भाषा में बताऊँगा कि गिरावट क्यों होती है, किन संकेतों पर ध्यान दें और निवेशक के तौर पर क्या व्यवहारिक कदम उठा सकते हैं।

गिरावट के प्रमुख कारण

पहला कारण ग्लोबल संकेत हैं: अमेरिका या चीन में बड़ी खबरें, एफेडरल रिजर्व के संकेत, या तेल की क़ीमतें सीधे भारतीय बाजार को प्रभावित करती हैं। दूसरा, विदेशी निवेश का बहिर्वाह (FII outflow) शेयरों में बिकवाली बढ़ा देता है। तिसरा, घरेलू मैक्रो संकेत — बढ़ती महंगाई, बढ़ता बांड यील्ड या RBI की दर नीतियाँ भी दबाव बढ़ाती हैं। चौथा, कंपनी-स्तर की बुरी खबरें या कमजोर कमाई (earnings) किसी सेक्टर को धकेल सकती हैं। अंत में भू-राजनीतिक घटनाएँ और बड़े राजनीतिक फैसले भी अचानक गिरावट ला सकते हैं।

निवेशक के लिए 7 व्यवहारिक कदम

1) शांत रहें और शीघ्र निर्णय न लें। तुरंत बेचने से अक्सर नुकसान पक्का हो जाता है।

2) पोर्टफोलियो जाँचें — कौन से स्टॉक्स आपने दीर्घकाल के लिए रखे हैं और कौन से स्पेक्युलेटिव हैं। दीर्घकालीन नींव वाले शेयरों को रखने पर विचार करें।

3) जोखिम प्रबंधन: हर पोजीशन पर स्टॉप-लॉस रखें और कुल पूंजी का केवल तय प्रतिशत ही एक शेयर में रखें।

4) SIP को बंद न करें; गिरावट में SIP छोटी-छोटी खरीदारी कर कीमतों को औसत करती है।

5) लिक्विडिटी बनाए रखें — आपातकाल के लिए नकद रखें ताकि मजबूरी में महंगा बेचने न पड़े।

6) टेक्निकल और फंडामेंटल संकेत देखिए: वॉल्यूम, सपोर्ट-रेज़िस्टेंस, VIX इन्डेक्स, 10 साल का बॉण्ड यील्ड और FII/DIIs के फंड फ्लो। ये बताते हैं कि बिकवाली अस्थायी है या जारी रह सकती है।

7) अगर खरीदना है तो चरणबद्ध (staggered) तरीके से खरीदें—सब एक साथ निवेश न करें। बड़ी खरीद के लिए पहले छोटे हिस्सों में डालें।

किसी शेयर की गिरावट हमेशा अवसर नहीं होती। अगर कंपनी की बुनियाद कमजोर है तो गिरावट में भी वह और गिर सकती है। इसलिए सिर्फ सस्ते भाव देख कर झपटना जोखिम भरा हो सकता है।

बाज़ार की खबरें कहां देखें? BSE/NSE की आधिकारिक साइट, भरोसेमंद आर्थिक वेबसाइट्स और ब्रोकरेज रिपोर्ट्स पर नजर रखें। हर रोज़ टॉप-लूजर्स और वॉल्यूम वाले स्टॉक्स देखें—वॉल्यूम के बिना रैली या गिरावट भरोसेमंद नहीं रहती।

अंत में, अपनी जोखिम सहनशीलता समझिए और प्लान बनाकर चलिए। गिरावट हर निवेशक की परीक्षा है—जो ठंडी दिमाग से फैसले लेता है, वही लंबी अवधि में बेहतर परिणाम पाता है। अगर जरूरत लगे तो वित्तीय सलाहकार से बात कर लें।

ट्रंप के टैरिफ अलर्ट का असर: फिर भी शुरुआती तेजी के बाद शेयर बाजार फिसला, सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार गिरावट

डोनाल्ड ट्रंप के 69 देशों पर 25% टैरिफ के ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज हुई। सेंसेक्स 586 अंक और निफ्टी 203 अंक गिरकर बंद हुए। फार्मा और आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जबकि FMCG में थोड़ी मजबूती दिखी। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से बाजार में घबराहट रही।

भारतीय इक्विटी सूचकांक में गिरावट; निफ्टी 24,500 से नीचे, सेंसेक्स में 931 अंकों की गिरावट

भारतीय इक्विटी सूचकांक 22 अक्टूबर, 2024 को कमजोरी के साथ बंद हुए, जहां निफ्टी 24,500 से नीचे और सेंसेक्स 931 अंक गिरा। हालांकि, बाद में सुधार हुआ और सेंसेक्स 73.48 अंक घाटे के साथ 81,151.27 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 112.50 अंक गिरकर 24,741.50 पर बंद हुआ। बाजार-ओपनिंग के बाद अमेरिकी डॉलर अपनी उच्चता पर रहा और सोने में उछाल देखा गया। ऑटो सेक्टर में हीलिंग दिखी, जबकि बाकी सभी सेक्टरों में गिरावट आयी।