स्पेस रेडिएशन क्या है? आसान जवाब
जब हम बात करते हैं स्पेस रेडिएशन की, तो मतलब होता है वह सभी प्रकार का ऊर्जा किरणें जो अंतरिक्ष से आती हैं। ये कण और तरंगें सूर्य के सौर तारा, गैलेक्सी के सुपरनोवा या ब्लैक होल जैसी घटनाओं से निकलती हैं। धरती पर हम इनसे बचते हैं क्योंकि हमारा वायुमंडल एक ढाल की तरह काम करता है, लेकिन अंतरिक्ष में यह सुरक्षा नहीं मिलती।
मुख्य प्रकार के स्पेस रेडिएशन
सौर कण इवेंट (Solar Particle Events): सूर्य अचानक तेज़ी से प्रोटॉन्स और हेवी आयन बाहर भेजता है। इनका असर अंतरिक्ष यान में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिगाड़ सकता है और एस्ट्रोनॉट्स के शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।
कॉस्मिक रे रेडिएशन (Cosmic Ray Radiation): गैलेक्सी से आती हुई तेज़ गति वाली कणें, जैसे हाई‑एनेर्जी प्रोटॉन्स, हीलियम नाभिक आदि। ये अत्यधिक पैठी होती हैं और मानव DNA को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे कैंसर का जोखिम बढ़ता है।
गैमा रे और एक्स‑रे (Gamma and X‑ray): बहुत उच्च ऊर्जा वाली विद्युत् चुम्बकीय तरंगें जो सुपरनोवा या ब्लैक होल के पास उत्पन्न होती हैं। ये भी जीवित कोशिकाओं को सीधे नुकसान पहुंचा सकती हैं।
स्पेस रेडिएशन का मानव शरीर पर असर और बचाव के उपाय
सबसे पहला असर है DNA में म्यूटेशन। जब कण हमारे सेल nucleus तक पहुँचते हैं, तो वह DNA की संरचना को बदल देते हैं। यह परिवर्तन कैंसर या अन्य दीर्घकालिक रोगों का कारण बन सकता है। दूसरे प्रभाव में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) पर दबाव पड़ता है, जिससे स्मृति और एकाग्रता कमजोर हो सकती है।
इन जोखिमों से बचने के लिए अंतरिक्ष एजेंसियां कई उपाय अपनाती हैं:
- शिल्डिंग: यान की दीवारें एल्यूमिनियम या पानी जैसी सामग्री से बनाई जाती हैं, जिससे कणों को रोकने की क्षमता बढ़ती है।
- फ्लाइट प्लैनिंग: सौर कण इवेंट के समय मिशन को देर से शुरू किया जाता है या अंतरिक्ष यान को सुरक्षित मोड में रखा जाता है।
- बायो‑मेट्रिक्स मॉनीटरिंग: एस्ट्रोनॉट्स पर लगातार रेडिएशन डोज़ मापा जाता है, ताकि सीमा पार न हो।
अगर आप अंतरिक्ष यात्रा या संबंधित करियर में रूचि रखते हैं, तो इस क्षेत्र की पढ़ाई शुरू करें—फिजिक्स, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और बायो‑मेडिकल रिसर्च को मिलाकर ही आप रेडिएशन के प्रभावों को समझ पाएंगे। साथ ही निजी कंपनियों ने भी नई टेक्नोलॉजी जैसे इलेक्ट्रॉनिक शिल्ड या मैग्नेटिक फील्ड प्रोटेक्टर्स पर काम शुरू किया है, जो भविष्य में सुरक्षा स्तर को और बेहतर बना सकते हैं।
तो अब आप जानते हैं कि स्पेस रेडिएशन क्या है, इसके किस‑केस होते हैं, और कैसे हम इसे नियंत्रित कर सकते हैं। अगली बार जब अंतरिक्ष मिशन की खबर आए, तो इन बिंदुओं पर नजर रखें—क्योंकि यह सिर्फ विज्ञान नहीं, बल्कि हमारी सुरक्षा का भी सवाल है।
रूस का Bion-M No. 2: 75 चूहे, 1,500 फल मक्खियाँ और चंद्र धूल के साथ स्पेस बायोलॉजी की नई उड़ान
रूस ने बायोन-एम नंबर 2 बायोसैटेलाइट को बायकोनूर से सोयुज 2.1b रॉकेट पर लॉन्च किया। 30 दिन के मिशन में 75 चूहे, 1,500 फल मक्खियाँ, पौधे, माइक्रोऑर्गेनिज़्म और 16 ट्यूब चंद्र धूल सिमुलेंट शामिल हैं। 97° झुकाव वाली कक्षा में पेलोड को पिछली उड़ान से कहीं ज्यादा कॉस्मिक रेडिएशन मिलेगा। यह शोध अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और भविष्य के चंद्र आधार की तैयारी से जुड़ा है।