ट्रंप टैरिफ: अमेरिका के आयात शुल्क और भारत पर असर

ट्रंप टैरिफ एक शब्द है जो 2018-19 में अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए बड़े आयात शुल्कों को दर्शाता है। इनमें खासकर इस्पात और एल्यूमिनियम पर Section 232 के तहत लगाए गए शुल्क और चीन पर Section 301 के तहत लगाए गए टैरिफ शामिल हैं। ये फैसले सीधे-सीधे दुनिया की सप्लाई चेन और व्यापार शर्तें बदलने लगे थे।

आप सोच रहे होंगे — इससे मुझे या मेरे बिजनेस को क्या फर्क पड़ेगा? असर कई तरह से दिखा: कुछ भारतीय निर्यातक नए ग्राहकों की तलाश में लगे, कुछ वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं, और कंपनियों ने सप्लायर बदलने या निर्माण-लॉजिस्टिक्स फिर से बनाने पर काम शुरू किया।

ट्रंप टैरिफ का आसान समयरेखा और असर

2018 में अमेरिका ने इस्पात और एल्यूमिनियम पर उच्च टैरिफ लगाए — उद्देश्य घरेलू उद्योग को बचाना बताया गया। इसके बाद चीन पर बड़े पैमाने पर टैरिफ लगे, जिससे ट्रांस-पैसिफिक सप्लाई चेन हिल गई। भारत पर भी प्रभाव पड़ा: 2019 में अमेरिका ने कुछ व्यापार विशेषाधिकार (जैसे GSP) वापस लिए, जिससे टेक्सटाइल, चामड़े और कुछ कृषि निर्यातकों को नुकसान हुआ।

क्या भारत ने भी जवाबी कदम उठाए? हाँ, भारत ने कुछ अमेरिकी वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई और वैकल्पिक बाजार ढूँढने का रुझान तेज हुआ। साथ ही, कंपनियों ने लागत बचाने के लिए उत्पादन भारत में शिफ्ट करने की योजना पर गौर करना शुरू किया।

आप क्या कर सकते हैं — व्यावहारिक कदम

अगर आप एक्सपोर्टर हैं: अपनी मार्केट डायवर्सिफिकेशन योजना बनाइए। मतलब, सिर्फ़ एक देश पर निर्भर न रहें; यूरोप, मध्यपूर्व और अफ्रीका में नई संभावनाएँ तलाशें।

अगर आप इम्पोर्टर हैं: अपने सप्लायर नेटवर्क की समीक्षा करें। चीन या अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक प्रोवाइडर खोजें या लोकल सोर्सिंग बढ़ाइए। कीमतों को लॉक करने के लिए फॉरेक्स हेजिंग और लॉजिस्टिक्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर ध्यान दें।

छोटी-छोटी चीजें जो तुरंत कर सकते हैं: HS कोड सही रखें ताकि गलत कस्टम क्लासिफिकेशन से अतिरिक्त चार्ज न लगें; ट्रेड नियमों में अपडेट के लिए कस्टम एजेंट या ट्रेड कंसल्टेंट से संपर्क बनाए रखें; और सरकारी एक्सपोर्ट–इन्फोरसमेंट स्कीम्स व रियायतों को चेक करते रहें।

क्या आगे और टैरिफ लगेंगे? पॉलिसी अचानक बदल सकती है। इसलिए ट्रंप टैरिफ जैसा कोई नया कदम दिखे तो सबसे पहले प्राइसिंग, सप्लाई और कॉन्ट्रैक्ट शर्तों का री–एस्सेसमेंट करें। चुनाव, द्विपक्षीय वार्तालाप और WTO फैसले इन सब पर असर डाल सकते हैं।

संक्षेप में, ट्रंप टैरिफ ने व्यापार के नियम बदल दिए और हमें अब ज्‍यादा सचेत रहकर सप्लाई चेन, कीमत और मार्केट रणनीति बनाने की ज़रूरत है। छोटे कारोबारियों के लिए तैयार रहना और विकल्प तलाशना अभी सबसे बेहतर रणनीति है।

ट्रंप के टैरिफ अलर्ट का असर: फिर भी शुरुआती तेजी के बाद शेयर बाजार फिसला, सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार गिरावट

डोनाल्ड ट्रंप के 69 देशों पर 25% टैरिफ के ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज हुई। सेंसेक्स 586 अंक और निफ्टी 203 अंक गिरकर बंद हुए। फार्मा और आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जबकि FMCG में थोड़ी मजबूती दिखी। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से बाजार में घबराहट रही।